01_Jako Veda Ratata
Whose names the Vedas continually recite
Sarang raga, dhrupad dhamar
जाको वेद रटत ब्रह्मा रटत शम्भु रटत शेष रटत नारद शुक व्यास रटत पावत नहीं पाररी।
ध्रुव जन प्रह्लाद रटत कुंती के कुंवर रटत द्रुपद सुता रटत नाथ अनाथन प्रति पालरी।।
गणिका गज गीध रटत गौतम की नार रटत राजन की रमणी रटत सुतन दे दे प्याररी।
नंददास श्री गोपाल गिरिवरधर रूपरसाल यशोदा को कुंवर लाल प्यारी राधा उर हाररी।।
Artist: Shyamdas, Tulsi (pakhavaj)
Album: Il Pilagio, 2002, Italy







